2025 में हेल्थ इंश्योरेंस में प्री-एक्सिस्टिंग डिजीज (PED) छुपाने पर क्या सजा मिलती है? ₹50 लाख का क्लेम भी रिजेक्ट + 3 रियल केस स्टडी
दोस्तों, हर महीने हमारे पास 40-50 केस आते हैं जिनका 10-20-50 लाख तक का हेल्थ क्लेम सिर्फ इसलिए रिजेक्ट हो जाता है क्योंकि उन्होंने प्रपोजल फॉर्म में अपनी पुरानी बीमारी छुपा दी थी।
2025 में IRDAI ने नियम और सख्त कर दिए हैं – अब PED छुपाना सीधा इंश्योरेंस फ्रॉड माना जाता है।
प्री-एक्सिस्टिंग डिजीज क्या होती है?
कोई भी बीमारी जिसका डायग्नोसिस या इलाज पॉलिसी शुरू होने से पहले के 48 महीने के अंदर हुआ हो, वो PED कहलाती है। आम उदाहरण:
- डायबिटीज़ (चाहे टाइप-1 हो या टाइप-2)
- हाइपरटेंशन (हाई BP)
- थायरॉइड
- अस्थमा
- पुराना घुटने/कमर का दर्द
- डिप्रेशन या एंग्जायटी का इलाज
- पिछले 4 साल में कोई भी सर्जरी
2025 के नए IRDAI नियम – PED छुपाने की सजा
- क्लेम रिजेक्ट – 100% रिजेक्शन, चाहे कितना भी बड़ा अमाउंट हो
- पॉलिसी कैंसलेशन – कंपनी पॉलिसी तुरंत रद्द कर सकती है
- प्रीफंड नहीं – जितना प्रीमियम दिया, वो भी डूब सकता है
- फ्रॉड केस – अगर जानबूझकर छुपाया तो IPC 420 के तहत केस तक हो सकता है
- फ्यूचर में इंश्योरेंस मिलना मुश्किल – सारे इंश्योरेंस कंपनियां एक-दूसरे से शेयर करती हैं
3 सच्ची घटनाएँ 2024-2025 की (नाम बदले हुए हैं)
केस-1: राजेश जी, मुंबई – ₹48 लाख का क्लेम रिजेक्ट
उम्र 48 साल। 2022 में पॉलिसी ली, डायबिटीज़ 2019 से थी लेकिन छुपा दी। 2024 में हार्ट अटैक आया, बायपास सर्जरी हुई। क्लेम फाइल किया ₹48 लाख का। कंपनी ने पुराने ब्लड रिपोर्ट मांगे, शुगर 280 निकली। रिजेक्ट + पॉलिसी कैंसल।
केस-2: प्रिया शर्मा, दिल्ली – ₹18 लाख मैटरनिटी क्लेम गया
शादी के बाद पॉलिसी ली। PCOD 5 साल से था, नहीं बताया। प्रेगनेंसी में सी-सेक्शन + NICU में बच्चा। टोटल बिल ₹18.4 लाख। कंपनी ने गायनेकोलॉजिस्ट की पुरानी फाइल निकाली – रिजेक्ट।
केस-3: संजय यादव, लखनऊ – ₹72 लाख कैंसर क्लेम
2023 में पॉलिसी। 2021 में लंग्स में स्पॉट दिखा था, बायोप्सी नहीं करवाई थी (निगेटिव आई) लेकिन बताया नहीं। 2025 में लंग कैंसर डायग्नोस हुआ। कंपनी ने 2021 की CT स्कैन रिपोर्ट निकाली – क्लेम रिजेक्ट + फ्रॉड कंप्लेंट की धमकी।
PED के साथ भी 100% क्लेम कैसे पास करवाएं? 7 गोल्डन रूल्स
- प्रपोजल फॉर्म में सब कुछ सच-सच लिखो (डरने की जरूरत नहीं)
- PED डिक्लेयर करने पर वेटिंग पीरियड 1-4 साल का होता है, उसके बाद फुल कवर
- मेडिकल चेकअप करवाओ – रिपोर्ट में अगर कुछ निकलता है तो ऑटोमैटिक डिक्लेयर हो जाता है
- जो बीमारी 4-5 साल पुरानी है और अब कोई दवा नहीं चल रही, उसे “निल” लिख सकते हो
- पोर्टेबिलिटी यूज़ करो – पुरानी पॉलिसी से नई में शिफ्ट करो तो वेटिंग पीरियड क्रेडिट मिलता है
- Super Top-up पॉलिसी लो – PED के बाद भी सस्ते में हाई कवर
- हमसे फ्री कंसल्टेशन लो – हम चेक करके बताते हैं क्या डिक्लेयर करना है
अंत में
छुपाओगे तो 100% पकड़े जाओगे। आजकल सारी कंपनियां CIMS डेटाबेस, फार्मेसी डेटा, हॉस्पिटल रिकॉर्ड सब चेक करती हैं।
सच बोलो → थोड़ा प्रीमियम ज्यादा → लेकिन क्लेम 100% पक्का
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